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चन्द्र रत्न मोती (Pearl) – मोती पहनने के लाभ और विधि क्या है | असली मोती की पहचान कैसे करें

चन्द्र रत्न मोती को अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है। संस्कृत में मोती रत्न को मौक्तिक, चंद्रमणि इत्यादि कहा जाता है। हिंदी और पंजाबी में मोती ही कहा जाता है। अंग्रेजी में Pearl कहा जाता है। मोती या मुक्ता रत्न का स्वामी चंद्रमा को माना जाता है।

असली मोती रत्न की पहचान कैसे करें?

असली मोती रत्न की पहचान रखना बेहद आवश्यक है। क्योंकि बाजार में अनेकों नकली मोती रत्न बेचे जाते हैं। जो कि काफी कम दाम पर भी मिल जाते हैं। कम दाम पर मिलने की वजह से लोग उन्हें असली मोती समझकर धारण कर लेते हैं। लेकिन वह नकली होने के कारण अपना प्रभाव नहीं दिखाता है। तो धारण किए हुए व्यक्ति को लगता है, कि यह सब फिजूल की बातें हैं। जो रत्न धारण करने के बारे में बताया गया है।

इसलिए यहां पर कुछ ऐसे आवश्यक असली मोती की पहचान करने के बारे में जानकारी दिया गया है। जिससे आप असली मोती की पहचान कर पाएंगे।

पहचान – असली मोती की पहचान आप स्वयं कर पाएंगे। क्योंकि असली मोती गोल, श्वेत, उज्जवल, चिकना, चंद्रमा के समान क्रांति युक्त, निर्मल एवं हल्कापन लिए होता है।

• गोमूत्र को किसी मिट्टी के बर्तन में डालकर उसमें मोती को रात भर के लिए रखें। यदि वह मोती अखंडित रहे तब वह मोती शुद्ध समझना चाहिए।
• पानी से भरे शीशे के गिलास में मोती को डाल दें। यदि पानी से किरणें सी निकलती दिखाई देने लगे, तो उस मोती को असली मोती समझना चाहिए।

अगर आपके पास असली मोती रत्न नहीं है, तो उसके जगह पर आप चन्द्रकांतमणि को या सफेद पुखराज भी धारण कर सकते हैं।

असली मोती रत्न धारण करने के लाभ

जो व्यक्ति असली मोती रत्न धारण करता है, तो उस व्यक्ति के मानसिक शक्ति का विकास, शारीरिक सौंदर्य की वृद्धि, स्त्री एवं धनादि सुखों की प्राप्ति, समरण शक्ति में वृद्धि, मानसिक रोगों से छुटकारा, मूर्छा या मिर्गी से छुटकारा, उन्माद से छुटकारा, रक्तचाप से छुटकारा, उदर विकार से छुटकारा, पथरी और दंत रोगों से भी छुटकारा मिलता है। अगर आपके अंदर यह सभी चीजों को संतुलित करना है। तो उसके लिए आप मोती रत्न धारण कर सकते हैं।

असली मोती रत्न धारण करने के विधि

असली मोती रत्न को धारण करने के लिए चांदी की अंगूठी में शुक्ल पक्ष में सोमवार को पूर्णिमा के दिन, चंद्रमा की होरा में गंगाजल, कच्चा दूध, व पाण्डुलादि में डूबते हुए “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः” के बीज मंत्र का पाठ 11 हजार की संख्या में करने के पश्चात धारण करना चाहिए। तदुपरांत चावल, चीनी, क्षीर, श्वेत फल, वस्त्र आदि का दान करना भी शुभ माना गया है।

मोती रत्ना किन किन राशि वाले जातकों को धारण करना चाहिए?

असली मोती रत्न सभी के लिए शुभ फल नहीं देता है। इसलिए आप अपनी जन्म कुंडली को किसी एस्ट्रोलॉजर से दिखाएं। और एस्ट्रोलॉजर की सलाह से ही कोई भी रत्न को धारण करें। जिससे आपको एक उत्तम जानकारी प्राप्त होगा। और आप जो भी रत्न धारण करेंगे। उसका प्रभाव आपके जीवन मे सकारात्मक देखने को मिलेगा।

असली मोती रत्न को धारण करने के लिए मोती रत्न को 2, 4, 6 अथवा 11 रत्ती का लेना चाहिए। इस मोती रत्न को कनिष्ठा उंगली में हस्त, रोहिणी अथवा श्रवण नक्षत्र में किसी ज्योतिष की सलाह से शुभ मुहूर्त में धारण करना चाहिए।

मोती रत्न धारण करने के लिए कुछ राशियों का नाम इस प्रकार हैं। मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, कन्या, तुला, वृश्चिक और मीन राशि या इन लग्न वाले जातक भी मोती रत्न को धारण कर सकते हैं। और उनको शुभ फल देखने को मिलेगा।

नोट – किसी भी रत्नों को धारण करने से पहले आपको किसी एस्ट्रोलॉजर से सलाह अवश्य लेना चाहिए। क्योंकि सभी रत्न का अपना एक सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव होता है। जो कि आपके जीवन में बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है। इसलिए आवश्यक जानकारी लेने के बाद ही किसी रत्नों को धारण करें। वरना बिना जानकारी के रत्न धारण करने से आपके ऊपर नकारात्मक प्रभाव भी आ सकता है। जिससे आपके जीवन में कई प्रकार के कष्ट आने लगेंगे।

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